आखिरकार कोरोना पर चीन को झुकना ही पड़ा

अंतरराष्ट्रीय

नई दिल्ली। टीएलआई

आखिरकार चीन को कोरोना वायरस के मामले में घुटनों पर आना ही पड़ा। वैश्विक दबाव में चीन ने बुधवार को डब्ल्यूएचओ की टीम को कोरोनो वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए देश का दौरा करने की अनुमति दे दी। चीन के वुहान में ही कोरोना वायरस का पहला मामला मिला था।
डब्ल्यूएचओ की टीम कोरोना वायरस की शुरुआत कहां से हुई, इसकी जांच चीन का दौरा करेगी। इसके लिए बुधवार को चीन ने आखिरकार सहमति दे ही दी। पहले डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस की उत्पति को लेकर चीन का बचाव किया था। इससे नाराज ट्रंप प्रशासन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से सभी संबंध तोड़ते का ऐलान कर दिया था। यही नहीं
हुए डब्ल्यूएचओ से अमेरिका के बाहर होने के अपने फैसले के बारे में भी संयुक्त राष्ट्र को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया था। बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संगठन को आर्थिक मदद रोकने की घोषणा की थी। साथ ही डब्ल्यूएचओ से अमेरिका के बाहर होने की अपनी मंशा भी मई में स्पष्ट रूप से जाहिर कर दी थी। अमेरिका ने पिछले साल चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस महामारी को लेकर डब्ल्यूएचओ पर बीजिंग का पक्ष लेने का भी आरोप लगाया था। उसका आरोप है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विश्व को गुमराह किया, जिसके कारण दुनिया भर में पांच लाख लोगों की मौत हुई। इनमें से 130000 मौत अकेले अमेरिका में हुई। इस मामले में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान का कहना है कि यह एक और उदाहरण है जब अमेरिका ने एकतरफा तरीके से कदम उठाया है। पहले भी कई संधि और संगठनों से अमेरिका अलग हो चुका है। इधर अमेरिका के, विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग होने के फैसले की चीन ने आलोचना करते हुए कहा कि यह एक और उदाहरण है जब अमेरिका ने एकतरफा कदम उठाया है। झाओ का कहना है कि डब्ल्यूएचओ वैश्विक जन स्वास्थ्य सुरक्षा पर दुनिया का सबसे बड़ा लोक प्राधिकार है । कोविड-19 महामारी जब गंभीर चरण में पहुंच गयी तो वैश्विक स्तर पर कदम उठाने में समन्वित भूमिका के लिए इसने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
वायरस के खिलाफ लड़ाई में डब्ल्यूएचओ का समर्थन करने का मतलब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन करना है और इससे कई लोगों की जान बचायी जा सकती है।

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