आदि कैलास यात्रा पर फिर शुरू हुई चहलपहल

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हल्द्वानी। अनीता रावत
कोरोना के कहर के चलते दो साल से बंद चल रही आदि कैलास यात्रियों का पहला दल यात्रा के बाद सकुशल धारचूला लौट आया है। सात सदस्यीय यात्री दल ने आदि कैलास और गणेश पर्वत की परिक्रमा दारमा से व्यास वैली के रास्ते सकुशल पूरी की है।

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यात्रा दल ने 2500 मीटर से 5549 मीटर की ऊंचाई तक करीब 150 किमी से अधिक दूरी पैदल तय की। इस दल के नाम पहली बार दारमा से व्यास वैली होकर आदि कैलास एवं गणेश पर्वत की परिक्रमा पूरी करने का रिकॉर्ड बना है। इससे पहले इस रास्ते किसी भी यात्री दल ने आदि कैलास की परिक्रमा नहीं की है।
कोरोना काल के बाद पिथौरागढ़ में पर्यटन कारोबार को पटरी पर लाने में एवरेस्ट विजेता योगेश सिंह गर्ब्याल और शीतल राज की संस्था ‘हिमालयन गोट्स’ आगे आई है। उनकी संस्था के पर्वतारोहियों के साथ टीम लीडर गणेश सिंह दुग्ताल के नेतृत्व में आठ सदस्यीय यात्री दल आदि कैलास की परिक्रमा के लिए 10 सितंबर को धारचूला से आगे के लिए रवाना हु़आ। इस दल में यात्रियों की मदद के लिए हिमालय गोट्स संस्था के पर्वतारोही जयेन्द्र फिरमाल, वंदना खैर, मुकेश गर्ब्याल, भूपेश खैर, राकेश नगन्याल ने यात्री दल का कदम-कदम पर मार्गदर्शन किया। दुग्तू से यात्री दल के एक सदस्य सुब्रमण्यम को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत के कारण आधे रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। पश्चिम बंगाल के यात्री दल के सात सदस्यों को इन पर्वतारोहियों ने आपदा में बह गए रास्तों और दिक्कतों के बीच पहली बार 5549 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सिमला पास दर्रे को पार कर आदि कैलास तक पहुंचाया। हिमालयन गोट्स के पर्वतारोही जयेन्द्र फिरमाल ने बताया इस दल ने नाम पहली बार दारमा से व्यास वैली होकर आदि कैलास एवं गणेश पर्वत की परिक्रमा पूरी करने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले इस रास्ते किसी भी यात्री दल ने आदि कैलास की परिक्रमा नहीं की है। यात्रा पूरी करने में 10 दिन का समय लगा। 20 सितंबर को यात्री दल गुंजी से वापस लौटा।

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